महज 10 से 15 हजार रुपये कमीशन के लालच में बेच दिए बैंक खाते, साइबर ठगों के एजेंट बने 5 आरोपी गिरफ्तार
जांजगीर-चांपा साइबर थाना की बड़ी कार्रवाई, म्यूल अकाउंट गिरोह का भंडाफोड़, बैंक कर्मचारी भी गिरफ्त में

जांजगीर-चांपा। साइबर ठगी के खिलाफ जांजगीर-चांपा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। साइबर थाना पुलिस ने देशभर में ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह से जुड़े म्यूल अकाउंट नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने महज 10 से 15 हजार रुपये कमीशन के लालच में अपने और अन्य लोगों के बैंक खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराए, जिनका इस्तेमाल करोड़ों की ऑनलाइन ठगी के नेटवर्क में किया जा रहा था। इस मामले में एक बैंक कर्मचारी की भूमिका भी सामने आने पर उसे भी गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देश पर समन्वय पोर्टल से प्राप्त इनपुट के आधार पर जांच शुरू की गई। तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग लेन-देन की जांच में खुलासा हुआ कि कर्नाटक और महाराष्ट्र के तीन साइबर फ्रॉड मामलों में 1,62,149 रुपये की ठगी की राशि इन्हीं म्यूल खातों में ट्रांसफर की गई थी।
गिरफ्तार आरोपी
- हरिशंकर श्रीवास (48), डोंगाघाट चौक, तपसीद्वार, चांपा
- अनिल नामदेव उर्फ चेतन (33), महादेव घाट, हटवारा चौक, चांपा
- राजेश सोनी उर्फ रिंकू सोनी (30), धोबीपारा, चांपा
- संदीप सिंह ठाकुर (36), परशुराम चौक, चांपा
- कमल विरानी (38), बरपाली चौक, चांपा
पूछताछ में बड़ा खुलासा
पूछताछ में हरिशंकर श्रीवास ने बताया कि अनिल नामदेव और राजेश सोनी ने उसे कमीशन का लालच देकर बैंक खाता खुलवाया था। जांच में यह भी सामने आया कि संदीप सिंह ठाकुर और कमल विरानी ने भी अपने तथा अन्य लोगों के खाते खुलवाकर साइबर गिरोह को उपलब्ध कराए। इन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम देशभर से मंगाई जाती थी।
क्या है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसे कोई व्यक्ति लालच या कमीशन के बदले साइबर अपराधियों को इस्तेमाल के लिए देता है। ऐसे खातों के माध्यम से ठगी की रकम एक खाते से दूसरे खाते में भेजी जाती है ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाए। कानून के अनुसार ऐसा खाता उपलब्ध कराने वाला व्यक्ति भी अपराध का सहभागी माना जाता है।
पुलिस की अपील
साइबर थाना ने लोगों से अपील की है कि किसी भी लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, ओटीपी या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी को न दें। यदि साइबर ठगी का शिकार हों तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर रिपोर्ट दर्ज कराएं, ताकि ठगी गई राशि को समय रहते रोका जा सके।





