मुख्यमंत्री के कार्यक्रम पर उठे सवाल: जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप ने कलेक्टर से मांगी सभी लोकार्पण-भूमिपूजन कार्यों की सूची
टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले हुए भूमिपूजन के खुलासे के बाद विधायक ने कहा- गड़बड़ी मिली तो विधानसभा में उठेगा मामला

एनकेडी@जांजगीर-चांपा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा जिले में 295 करोड़ रुपये से अधिक के 341 विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम के बाद अब यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय बनता जा रहा है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले कुछ कार्यों के भूमिपूजन किए जाने के खुलासे के बीच जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप ने जिला प्रशासन से कार्यक्रम में शामिल सभी कार्यों की विस्तृत जानकारी मांगी है।

विधायक ब्यास कश्यप ने कहा है कि मुख्यमंत्री के हाथों जिन कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन कराया गया, उनकी विभागवार सूची, स्वीकृति, निविदा और कार्यादेश संबंधी दस्तावेजों की जानकारी प्रशासन से मांगी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की प्रक्रिया संबंधी अनियमितता या नियमों के उल्लंघन के तथ्य सामने आते हैं तो इस विषय को विधानसभा में प्रमुखता से उठाया जाएगा।
नवीन कदम डिजिटल से फोन पर चर्चा में बोले विधायक ब्यास कश्यप- अनियमितता मिली तो विधानसभा में उठाएंगे मामला
जांजगीर-चांपा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा जिले में किए गए विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम को लेकर सामने आए खुलासों के बाद जांजगीर-चांपा विधायक ब्यास कश्यप ने मामले को गंभीरता से लिया है। जम्मू-कश्मीर प्रवास पर मौजूद विधायक ब्यास कश्यप ने नवीन कदम डिजिटल के संपादक राजेंद्र राठौर से फोन पर चर्चा करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों जिन कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन कराया गया है, उनकी विभागवार विस्तृत सूची जिला प्रशासन से मांगी गई है।
विधायक ब्यास कश्यप ने बताया कि उन्होंने संबंधित कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति, निविदा (टेंडर) प्रक्रिया, कार्यादेश (वर्क ऑर्डर) और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी भी तलब की है। उनका कहना है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सर्वोपरि है तथा किसी भी स्तर पर प्रक्रिया से समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि यदि दस्तावेजों के परीक्षण के दौरान किसी प्रकार की प्रशासनिक अनियमितता, नियमों की अनदेखी अथवा निर्धारित प्रक्रिया के उल्लंघन के तथ्य सामने आते हैं, तो इस मामले को विधानसभा में प्रमुखता से उठाया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी।
गौरतलब है कि हाल ही में यह मामला सामने आया है कि कुछ विकास कार्यों की निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही उनका भूमिपूजन करा दिया गया। इस खुलासे के बाद अब विधायक द्वारा दस्तावेज मांगे जाने से पूरे मामले ने नया राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। विधायक के इस बयान के बाद अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले दस्तावेजों और उनकी जांच पर टिकी हैं।
टेंडर पूरा नहीं, फिर भी भूमिपूजन?
हाल ही में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, लोक निर्माण विभाग के कुछ ऐसे कार्य भी भूमिपूजन सूची में शामिल रहे, जिनकी निविदा प्रक्रिया अभी पूर्ण नहीं हुई थी। कई कार्यों की निविदा जमा करने की अंतिम तिथि जून माह के अंतिम सप्ताह तक निर्धारित बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब ठेकेदार का चयन और कार्यादेश जारी होने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, तब भूमिपूजन किस आधार पर कराया गया।
विधायक ने मांगा पूरा ब्योरा
विधायक ब्यास कश्यप का कहना है कि विकास कार्यों का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन यदि प्रक्रियाओं की अनदेखी कर केवल औपचारिकता निभाई गई है तो इसकी जवाबदेही तय होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जनता के धन से होने वाले कार्यों में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्रशासन और विभाग पर बढ़ा दबाव
विधायक द्वारा विस्तृत सूची और दस्तावेज मांगे जाने के बाद अब जिला प्रशासन और संबंधित विभागों पर जवाब देने का दबाव बढ़ गया है। राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा है कि यदि दस्तावेजों में विसंगतियां सामने आती हैं तो यह मामला विधानसभा तक पहुंच सकता है।
मुख्य सवाल अभी भी कायम
- क्या सभी भूमिपूजित कार्यों में निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी?
- क्या संबंधित कार्यों के लिए कार्यादेश जारी किए गए थे?
- क्या मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रत्येक परियोजना की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया गया था?
- यदि किसी कार्य की निविदा बाद में निरस्त होती है तो उसके भूमिपूजन की जिम्मेदारी किसकी होगी?
अब सभी की नजर जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली जानकारी और आगे की राजनीतिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।




