Akaltara: पंच पहुंचे, सरपंच-सचिव गायब: झलमला पंचायत की बैठक बनी मजाक, विकास कार्यों पर उठे सवाल
बरसात पूर्व तैयारी और ग्रामीण समस्याओं पर होनी थी चर्चा, इंतजार करते रहे जनप्रतिनिधि

NKD@अकलतरा। ग्राम पंचायतों को ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई माना जाता है, लेकिन जब पंचायत की बैठकों में ही जिम्मेदार पदाधिकारी अनुपस्थित रहने लगें तो विकास कार्यों की गति पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसा ही मामला अकलतरा जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत झलमला में सामने आया है, जहां निर्धारित ग्राम सभा बैठक में पंच तो पहुंचे, लेकिन सरपंच और सचिव के नहीं पहुंचने से बैठक नहीं हो सकी।

जानकारी के अनुसार जून माह की पंचायत बैठक में बरसात से पहले गांव की आवश्यक समस्याओं, जल निकासी व्यवस्था, स्वच्छता, निर्माण कार्यों और विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा होनी थी। पहले यह बैठक 10 जून को प्रस्तावित थी, लेकिन कोरम पूरा नहीं होने के कारण इसे 13 जून के लिए स्थगित कर दिया गया था।
बैठक स्थल पर इंतजार, लेकिन नहीं पहुंचे जिम्मेदार
13 जून को पंचायत भवन में पंच निर्धारित समय पर पहुंच गए और बैठक शुरू होने की प्रतीक्षा करते रहे। आरोप है कि सरपंच काशीराम निर्मलकर और सचिव रमेश यादव न तो बैठक में पहुंचे और न ही अनुपस्थिति की कोई पूर्व सूचना दी गई। इससे उपस्थित पंचों में नाराजगी देखी गई।
पंच श्रवण निर्मलकर का कहना है कि गांव में कई ऐसी समस्याएं हैं जिन पर तत्काल निर्णय लेने की आवश्यकता है। बरसात के दौरान कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन जाती है, जिससे ग्रामीणों को परेशानी और बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा कई विकास कार्य और शासकीय योजनाएं भी चर्चा एवं प्रस्ताव के अभाव में लंबित हैं।
‘बैठक नहीं तो विकास कैसे?’
ग्रामीण जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पंचायत की नियमित बैठकों का उद्देश्य ही गांव की समस्याओं का समाधान और विकास योजनाओं की रूपरेखा तैयार करना होता है। यदि बैठकें समय पर नहीं होंगी तो विकास कार्य प्रभावित होना तय है। पंचों ने सरपंच और सचिव की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे पंचायत प्रशासन की लापरवाही बताया है।
ग्रामीणों में बढ़ रही नाराजगी
बैठक निरस्त होने के बाद ग्रामीणों के बीच भी चर्चा का माहौल है। लोगों का कहना है कि पंचायत स्तर पर जवाबदेही तय होनी चाहिए ताकि गांव के विकास से जुड़े मुद्दे लंबित न रहें। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि अगली बैठक कब आयोजित होती है और लंबित समस्याओं पर क्या निर्णय लिया जाता है।




