
राजेंद्र राठौर@जांजगीर। शहर की पहचान और जनभावनाओं से जुड़े भीमा तालाब के संरक्षण का मुद्दा अब जनआंदोलन की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। ऐतिहासिक जलस्रोत को बचाने, उसकी साफ-सफाई सुनिश्चित करने और उसके अस्तित्व को सुरक्षित रखने की मांग को लेकर भीमा तालाब बचाओ अभियान के तहत आगामी 14 तारीख को जांजगीर में संभावित जनआंदोलन आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।

भीमा तालाब का मुद्दा केवल एक जलाशय की साफ-सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहर की प्राकृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों के लिए जलस्रोतों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। ऐसे में अभियान के जरिए शासन-प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है कि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण समय रहते सुनिश्चित किया जाए।
धरोहर बचाने अब जनभागीदारी की जरूरत
अभियान से जुड़े लोगों का मानना है कि भीमा तालाब के संरक्षण के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। केवल मांग उठाने से नहीं, बल्कि नियमित साफ-सफाई, उचित देखरेख और संरक्षण की स्पष्ट कार्ययोजना से ही इस जलस्रोत को सुरक्षित रखा जा सकता है। जनआंदोलन के माध्यम से नगरवासियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं और जनप्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रशासन की भूमिका पर टिकी निगाहें
भीमा तालाब को सुरक्षित रखने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और भविष्य में इसके संरक्षण के लिए क्या कार्ययोजना बनाई जाएगी, यह सवाल भी महत्वपूर्ण है। संभावित जनआंदोलन के जरिए प्रशासन तक जनता की आवाज पहुंचाने और इस विषय पर गंभीर पहल की मांग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
नगरवासियों से एकजुट होने की अपील
भीमा तालाब बचाओ अभियान की ओर से समस्त नगरवासियों से इस जनहित के मुद्दे पर सहयोग करने की अपील की गई है। अभियान का उद्देश्य तालाब को शहर की सुरक्षित प्राकृतिक धरोहर के रूप में बनाए रखना और इसके संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का भाव मजबूत करना है।
जनआंदोलन की अंतिम तिथि, समय और स्थान की आधिकारिक जानकारी शीघ्र जारी किए जाने की बात कही गई है। अब देखना होगा कि इस पहल को नगरवासियों का कितना समर्थन मिलता है और भीमा तालाब के संरक्षण की मांग पर शासन-प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।




