Success Story: जांजगीर-चांपा के प्रगतिशील किसान शिवकुमार तिवारी बने नवाचार और आत्मनिर्भरता की मिसाल, राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुके हैं कई सम्मान
ग्राम मुनुंद के शिव कुमार तिवारी की कहानी बताती है कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि नवाचार, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का माध्यम भी बन सकती है। ऐसे किसान ही ग्रामीण भारत की वास्तविक ताकत हैं, जो अपने कार्यों से आने वाली पीढ़ियों को नई राह दिखा रहे हैं।

NKD@जांजगीर-चांपा। अक्सर कहा जाता है कि खेती केवल परंपरा नहीं, बल्कि विज्ञान और नवाचार का संगम है। इस बात को सच साबित कर रहे हैं जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम मुनुंद के प्रगतिशील किसान शिव कुमार तिवारी, जिन्होंने अपनी दूरदर्शिता, मेहनत और आधुनिक सोच के बल पर खेती को एक नई दिशा दी है। आज वे न केवल अपने क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा हैं, बल्कि कृषि विद्यार्थियों के लिए भी एक जीवंत पाठशाला बन चुके हैं।
हाल ही में छत्तीसगढ़ कृषि महाविद्यालय, भिलाई की छात्रा अन्वेषा तिवारी ने उनके खेत का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें आधुनिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को करीब से समझने का अवसर मिला। खेत भ्रमण का अनुभव उनके लिए केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि अत्यंत प्रेरणादायक भी रहा।
जैविक खेती से प्रकृति और उत्पादन दोनों का संरक्षण
शिव कुमार तिवारी रासायनिक खेती पर निर्भर रहने के बजाय जैविक खेती को बढ़ावा देते हैं। वे वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हैं। इससे उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ती है और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान मिलता है। उनका मानना है कि खेती का भविष्य ऐसी तकनीकों में है जो किसान की आय बढ़ाने के साथ-साथ भूमि और जल जैसे प्राकृतिक संसाधनों को भी सुरक्षित रखें।
आधुनिक तकनीकों को अपनाकर बदली खेती की तस्वीर
कृषक तिवारी ने खेती को पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकालते हुए कई आधुनिक तकनीकों को अपनाया है। उनके खेत में ग्राफ्टेड सब्जियों की खेती, कटिंग फ्लावर उत्पादन तथा उन्नत कृषि प्रबंधन तकनीकों का सफल प्रयोग किया जा रहा है। इन नवाचारों के कारण उत्पादन और गुणवत्ता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उनका खेत आज क्षेत्र के किसानों के लिए एक मॉडल फार्म के रूप में देखा जाता है, जहां सीखने के लिए लगातार किसान और विद्यार्थी पहुंचते हैं।
गांव में कृषि कार्यों के लिए सोलर पैनल प्रणाली स्थापित करने वाले पहले किसान
मुनुंद गांव में कृषि कार्यों के लिए सोलर पैनल प्रणाली स्थापित करने वाले वे पहले किसान हैं। सौर ऊर्जा के उपयोग से उन्होंने सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों की लागत कम की है। साथ ही स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया है। उनकी इस पहल ने आसपास के किसानों को भी नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुका है सम्मान
कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए शिव कुमार तिवारी को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। इनमें इफको महिंद्रा समृद्धि एग्री अवार्ड, ई-भारत गुजरात ग्लोबल एग्रीकल्चर समिति सम्मान सहित अनेक राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार शामिल हैं। इसके अलावा उन्हें इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर तथा बिलासपुर में भी विभिन्न अवसरों पर सम्मानित किया जा चुका है।
युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा
शिव कुमार तिवारी का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक सोच, आधुनिक तकनीक और जैविक पद्धतियों को अपनाएं तो खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार और परिश्रम के बल पर कृषि में नई ऊंचाइयां हासिल की जा सकती हैं।
आने वाली पीढ़ियों को दिखा रहे हैं नई राह
ग्राम मुनुंद के शिव कुमार तिवारी की कहानी बताती है कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि नवाचार, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का माध्यम भी बन सकती है। ऐसे किसान ही ग्रामीण भारत की वास्तविक ताकत हैं, जो अपने कार्यों से आने वाली पीढ़ियों को नई राह दिखा रहे हैं।
(रिपोर्ट: अन्वेषा तिवारी, छात्रा, छत्तीसगढ़ कृषि महाविद्यालय, भिलाई)





