सक्ती का चपड़ा उद्योग: देशभर में पहचान दिला रहा पारंपरिक कारोबार
सक्ती जिले में निर्मित चपड़ा की सप्लाई बड़े पैमाने पर पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में की जाती है। व्यापारियों के अनुसार यहां तैयार होने वाली चपड़ा की गुणवत्ता के कारण इसकी बाजार में लगातार मांग बनी रहती है।

शहजाद खान@सक्ती। छत्तीसगढ़ का सक्ती जिला आज अपने पारंपरिक लाह (Lac) और उससे बनने वाली चपड़ा (Shellac) उद्योग के कारण देशभर में अलग पहचान बना चुका है। यहां वर्षों से संचालित हो रहे कुटीर एवं लघु उद्योग प्राकृतिक लाह को प्रोसेस कर उच्च गुणवत्ता वाली चपड़ा तैयार करते हैं, जिसकी मांग देश के कई बड़े औद्योगिक राज्यों तक फैली हुई है।
प्राकृतिक संसाधन से तैयार होता है मूल्यवान उत्पाद
सक्ती और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पेड़ों से प्राप्त प्राकृतिक लाह को एकत्रित कर विशेष प्रक्रिया के माध्यम से साफ, सुखाकर और परिष्कृत किया जाता है। इसके बाद तैयार होती है “चपड़ा”, जिसे अंग्रेजी में शेलैक (Shellac) कहा जाता है। यह पूरी प्रक्रिया पारंपरिक अनुभव और स्थानीय तकनीक पर आधारित होती है, जिससे तैयार उत्पाद की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है।
कई राज्यों में होती है चपड़ा की सप्लाई
सक्ती जिले में निर्मित चपड़ा की सप्लाई बड़े पैमाने पर पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में की जाती है। व्यापारियों के अनुसार यहां तैयार होने वाली चपड़ा की गुणवत्ता के कारण इसकी बाजार में लगातार मांग बनी रहती है।
कई उद्योगों के लिए जरूरी कच्चा माल
सक्ती में तैयार चपड़ा का उपयोग वार्निश, पेंट, लकड़ी पॉलिश, सौंदर्य प्रसाधन, आभूषण निर्माण और दवा उद्योग में बड़े पैमाने पर किया जाता है। प्राकृतिक उत्पाद होने के कारण इसकी उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी
लाह और चपड़ा उद्योग सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हजारों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन भी बना हुआ है। किसान, मजदूर और कारीगर इस उद्योग से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि यह उद्योग सक्ती जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
परंपरा के साथ आधुनिक पहचान
स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों का कहना है कि यदि इस उद्योग को आधुनिक तकनीक, सरकारी प्रोत्साहन और बेहतर मार्केटिंग सुविधा मिले, तो सक्ती का चपड़ा उद्योग राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान बना सकता है।





