Akaltara: क्या दोबारा बुलाई गई बैठक में शामिल होंगे उपाध्यक्ष और पार्षद? नगर पालिका अध्यक्ष और सीएमओ की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद लंबे इंतजार के पश्चात 26 मई को सामान्य सभा की बैठक आयोजित की गई थी, लेकिन बैठक के दौरान हुए विवाद के बाद अब पुनः 29 मई को बैठक बुलाए जाने से परिषद के भीतर असंतोष और सवाल दोनों बढ़ गए हैं।

NKD@अकलतरा। नगर पालिका परिषद अकलतरा की सामान्य सभा की बैठक को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद लंबे इंतजार के पश्चात 26 मई को सामान्य सभा की बैठक आयोजित की गई थी, लेकिन बैठक के दौरान हुए विवाद के बाद अब पुनः बैठक बुलाए जाने से परिषद के भीतर असंतोष और सवाल दोनों बढ़ गए हैं।
जानकारी के अनुसार, सामान्य सभा की बैठक में नगर हित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। बोर खनन, प्लेसमेंट, पेंशन सहित अन्य लंबित मामलों पर विचार कर प्रस्ताव पारित किए गए। बताया जा रहा है कि प्रारंभिक कार्यवाही अध्यक्ष दीप्ति सारथी की उपस्थिति में ही संपन्न हुई। इसी दौरान गोपिया तालाब मामले में दर्ज एफआईआर का मुद्दा उठा, जिस पर बैठक का माहौल गर्म हो गया।
सूत्रों के अनुसार, अध्यक्ष दीप्ति सारथी ने तालाब मामले में एफआईआर को लेकर आपत्ति जताई, जिस पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) संजय सिंह सहित अन्य सदस्यों द्वारा उन्हें बताया गया कि मौके पर तैयार पंचनामा रिपोर्ट एवं उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई थी। इसके बावजूद विवाद बढ़ता गया और अध्यक्ष नाराज होकर बैठक छोड़कर चली गईं।
उस समय सीएमओ संजय सिंह ने बताया था कि अध्यक्ष को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन वे वापस बैठक में शामिल नहीं हुईं। इसके बाद उपाध्यक्ष और उपस्थित पार्षदों की सहमति से बैठक की आगे की कार्यवाही जारी रखी गई। बताया जाता है कि उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में लगभग पांच घंटे तक बैठक चली और कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।
फिर क्यों बुलाई गई नई बैठक?
अब विवाद का मुख्य कारण 29 मई को पुनः सामान्य सभा की बैठक बुलाया जाना है। नगर पालिका द्वारा जारी पत्र में 26 मई की बैठक को स्थगित बताते हुए उसी एजेंडे पर दोबारा बैठक आयोजित करने की सूचना दी गई है।
यहीं से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि बैठक वास्तव में स्थगित थी तो उसके बाद घंटों तक कार्यवाही कैसे चली? यदि उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई कार्यवाही वैध थी तो फिर उसी विषय पर दोबारा बैठक बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? और यदि कार्यवाही अवैध थी तो उसे तत्काल क्यों नहीं रोका गया?
क्या कहते हैं नियम?
छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 की धारा 59 के अनुसार अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष परिषद की बैठक की अध्यक्षता कर सकता है। यदि अध्यक्ष किसी कारणवश बैठक छोड़ दे और बैठक में गणपूर्ति (कोरम) मौजूद हो तो उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में कार्यवाही जारी रखी जा सकती है।
इसी आधार पर अब परिषद के कई सदस्य सवाल उठा रहे हैं कि अध्यक्ष के बैठक छोड़ने के बाद उपाध्यक्ष द्वारा संचालित कार्यवाही को किस आधार पर दोबारा विचार के लिए लाया जा रहा है।
सीएमओ और अध्यक्ष दोनों पर उठ रहे सवाल
नगर पालिका के भीतर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या पुनः बैठक बुलाने का निर्णय प्रशासनिक आवश्यकता के तहत लिया गया है या फिर किसी दबाव में। कई पार्षदों का कहना है कि यदि दोबारा बैठक बुलानी ही थी तो पूर्व में पांच घंटे तक चली कार्यवाही का औचित्य क्या था।
वहीं परिषद के कुछ सदस्यों का यह भी कहना है कि लंबे समय तक सामान्य सभा की बैठक नहीं होने के कारण नगर के कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हुए हैं। विकास कार्यों से जुड़े प्रस्ताव लंबित रहे और जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा।
जल संकट से जूझ रही जनता
इस पूरे विवाद के बीच नगरवासी मूलभूत समस्याओं को लेकर परेशान हैं। वर्तमान में अकलतरा के कई वार्ड भीषण जल संकट का सामना कर रहे हैं। नागरिकों का आरोप है कि यदि समय पर परिषद की बैठकें आयोजित होतीं और बोर खनन जैसे आवश्यक प्रस्तावों पर निर्णय लिए जाते, तो आज हालात इतने गंभीर नहीं होते।
नगरवासियों का कहना है कि परिषद को विवादों और आपसी टकराव से ऊपर उठकर नगर हित के कार्यों पर ध्यान देना चाहिए। लोगों का कहना है कि यदि अध्यक्ष का अधिकांश समय धरना-प्रदर्शन, शिकवा-शिकायत और आरोप-प्रत्यारोप में ही बीतता रहा तो पांच वर्ष का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा, लेकिन नगर की समस्याएं जस की तस बनी रहेंगी।
क्या बैठक में शामिल होंगे उपाध्यक्ष और पार्षद?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 29 मई को बुलाई गई बैठक में उपाध्यक्ष और वे पार्षद शामिल होंगे या नहीं, जिन्होंने पूर्व बैठक में प्रस्तावों को पारित किया था। यदि वे शामिल नहीं होते हैं तो विवाद और गहरा सकता है, वहीं शामिल होने की स्थिति में पूर्व में पारित प्रस्तावों की वैधानिक स्थिति पर भी चर्चा होना तय माना जा रहा है।
सीएमओ का पक्ष नहीं मिल सका
मामले की अधिक जानकारी और नगर पालिका प्रशासन का पक्ष जानने के लिए मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) संजय सिंह से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया। प्रारंभिक कॉल के दौरान उनका मोबाइल व्यस्त मिला। इसके बाद पुनः फोन किए जाने पर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। जिसके कारण बैठक को पुनः बुलाए जाने और पूर्व में पारित प्रस्तावों की स्थिति को लेकर उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
फिलहाल नगर पालिका परिषद की बैठक को लेकर बना यह विवाद नगर की राजनीति का सबसे चर्चित विषय बन गया है। अब सबकी निगाहें 29 मई की बैठक पर टिकी हैं, जहां यह साफ हो सकेगा कि परिषद विकास कार्यों की दिशा में आगे बढ़ेगी या फिर विवादों का सिलसिला और लंबा होगा।





