जांजगीर-चांपा में बहुचर्चित कार चालक हत्याकांड: अपहरण, लूट और हत्या के तीन दोषियों को आजीवन कारावास
पत्थर से कुचलकर की थी चालक की हत्या, शव नहर किनारे फेंका, लूटी गई कार बेचने की थी साजिश

राजेंद्र राठौर@जांजगीर-चांपा। बहुचर्चित कार चालक रमाकांत तिवारी अपहरण, लूट एवं हत्या कांड में करीब दो वर्ष बाद न्याय का फैसला सामने आया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश, जांजगीर ने मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने हत्या, अपहरण, लूट और साक्ष्य मिटाने जैसे गंभीर अपराधों को प्रमाणित मानते हुए प्रत्येक आरोपी पर अर्थदंड भी लगाया है।
अभियोजन के अनुसार, 13 अप्रैल 2024 को आरोपी विवेकपुरी गोस्वामी ने नए मोबाइल नंबर से डिजायर कार बुक कराई। चालक रमाकांत तिवारी रात में बिलासपुर से आरोपियों को लेकर अमरकंटक के लिए रवाना हुआ। यात्रा के दौरान आरोपियों ने सुनसान स्थान पर शौच जाने का बहाना बनाकर कार रुकवाई। जैसे ही चालक नीचे उतरा, तीनों ने उस पर हमला कर दिया। मारपीट के बाद पत्थर से उसके सिर पर कई वार किए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
शव नहर किनारे फेंका, कार बेचने की बनाई योजना
हत्या के बाद आरोपियों ने शव को कार की पिछली सीट में डालकर सारागांव थाना क्षेत्र के लखुर्री नहर के पास फेंक दिया। इसके बाद लूटी गई कार को बेचकर पैसे कमाने और साक्ष्य मिटाने की योजना बनाई गई। हालांकि, पुलिस की जांच ने पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।
तकनीकी साक्ष्य और गवाह बने सबसे बड़ा आधार
मामले की विवेचना के दौरान पुलिस ने मोबाइल कॉल डिटेल, परिस्थितिजन्य साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। पूछताछ में मिले तथ्यों और जब्त साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में चालान पेश किया गया।
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष ने 15 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए। न्यायालय ने माना कि सभी साक्ष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और अभियोजन अपराध सिद्ध करने में पूरी तरह सफल रहा।
तीनों आरोपियों को उम्रकैद
न्यायालय ने आरोपी राहुल श्रीवास, सोमप्रभात साहू और विवेकपुरी गोस्वामी को हत्या, अपहरण, लूट और साक्ष्य मिटाने के अपराध में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही विभिन्न धाराओं के तहत प्रत्येक पर ₹10-10 हजार का अर्थदंड भी लगाया गया।
लोक अभियोजक की प्रभावी पैरवी
इस मामले में शासन की ओर से लोक अभियोजक संदीप सिंह बनाफर ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालय ने अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए दोषियों को कठोर दंड सुनाया।





