परिवार परामर्श केंद्र में काउंसलर कौन बन सकता है? जांजगीर में नियुक्तियों पर उठे सवाल, क्या नियमों का हुआ पालन?
योग्यता, अनुभव, चयन समिति और नियुक्ति प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग तेज, संवेदनशील जिम्मेदारी पर पारदर्शिता को लेकर बहस

विधिक संवाददाता@जांजगीर-चांपा। परिवार परामर्श केंद्र जांजगीर में हालिया नियुक्तियों के बाद अब बहस केवल किसी एक नाम तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पूरा फोकस इस सवाल पर आ गया है कि आखिर परिवार परामर्श केंद्र में काउंसलर बनने के लिए क्या-क्या अनिवार्य मापदंड तय हैं और क्या जिले में इनका पालन किया गया है?

चूंकि, परिवार परामर्श केंद्र पति-पत्नी के विवाद, घरेलू हिंसा, पारिवारिक तनाव, महिला एवं बाल संरक्षण जैसे अत्यंत संवेदनशील मामलों की काउंसलिंग करता है, इसलिए यहां नियुक्त प्रत्येक काउंसलर की शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, निष्पक्षता और सामाजिक स्वीकार्यता सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अब जिले के सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों की ओर से मांग उठ रही है कि पुलिस विभाग नियुक्त सभी काउंसलरों की योग्यता, अनुभव, चयन प्रक्रिया तथा चयन समिति का पूरा विवरण सार्वजनिक करे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नियुक्तियां निर्धारित मानकों के अनुरूप हुई हैं या नहीं।
क्या कहते हैं सामान्य मानक और दिशा-निर्देश?
परिवार परामर्श केंद्रों के संचालन के लिए विभिन्न राज्यों एवं पुलिस मुख्यालयों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में सामान्यतः निम्न योग्यताओं और मापदंडों को महत्व दिया जाता है—
- समाज कार्य (MSW/BSW), मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, विधि (LLB) या संबंधित विषय में शैक्षणिक योग्यता।
- पारिवारिक परामर्श, महिला एवं बाल संरक्षण, सामाजिक कार्य या काउंसलिंग का व्यावहारिक अनुभव।
- निष्पक्ष छवि और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय योगदान।
- संवाद कौशल, मध्यस्थता (Mediation) और विवाद समाधान की क्षमता।
- किसी गंभीर आपराधिक मामले में संलिप्तता नहीं होना।
- चयन समिति द्वारा साक्षात्कार अथवा निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से चयन।
(नोट: विभिन्न राज्यों में लागू नियमों में कुछ अंतर हो सकता है। संबंधित राज्य या पुलिस मुख्यालय के दिशा-निर्देश अंतिम रूप से लागू होते हैं।)
उठ रहे हैं ये अहम सवाल
- क्या जांजगीर परिवार परामर्श केंद्र के सभी काउंसलर निर्धारित शैक्षणिक योग्यता रखते हैं?
- क्या सभी के पास काउंसलिंग अथवा सामाजिक कार्य का आवश्यक अनुभव है?
- क्या नियुक्ति के लिए सार्वजनिक आवेदन आमंत्रित किए गए थे?
- चयन समिति में कौन-कौन सदस्य शामिल थे?
- चयन के लिए अंक निर्धारण या मेरिट का कोई रिकॉर्ड तैयार किया गया?
- क्या नियुक्ति संबंधी आदेश और पात्रता सूची सार्वजनिक की जाएगी?
संवेदनशील जिम्मेदारी, इसलिए जरूरी है पारदर्शिता
परिवार परामर्श केंद्र केवल समझौता कराने का मंच नहीं है, बल्कि कई मामलों में टूटते परिवारों को बचाने और महिलाओं, बच्चों तथा वरिष्ठ नागरिकों के हितों की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में यहां कार्यरत काउंसलरों की नियुक्ति पूरी तरह योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर होना जनविश्वास की दृष्टि से आवश्यक माना जाता है।
पुलिस विभाग से उठी यह मांग
सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि नियुक्तियां पूरी तरह नियमों के अनुरूप हुई हैं तो पुलिस विभाग को सभी काउंसलरों की शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, चयन समिति, चयन प्रक्रिया और नियुक्ति के आधार को सार्वजनिक करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इससे न केवल उठ रहे सवालों का जवाब मिलेगा, बल्कि परिवार परामर्श केंद्र की विश्वसनीयता भी और मजबूत होगी।
फिलहाल पुलिस विभाग की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया, पात्रता मानकों और चयन के आधार को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग पारदर्शिता के हित में इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है।




