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‘नायक’ फिल्म का सीन हुआ हकीकत! कीचड़ में नहाकर विरोध करने वाला ग्रामीण अब दूध से नहाकर बोला— “अब बनी बात”

डोंगाकोहरौद गांव में अनोखे अंदाज में सरकार का जताया आभार, सड़क निर्माण की स्वीकृति के बाद फिर सुर्खियों में आया आंदोलन का चेहरा

राजेंद्र राठौर@जांजगीर-चांपा/पामगढ़। बॉलीवुड की चर्चित फिल्म ‘नायक’ में अभिनेता अनिल कपूर का वह दृश्य शायद ही किसी ने भुलाया होगा, जब जनता खुशी में उनका दुग्धाभिषेक करती है। कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों पामगढ़ विकासखंड के ग्राम डोंगाकोहरौद में देखने को मिला। फर्क सिर्फ इतना था कि यहां किसी मुख्यमंत्री का नहीं, बल्कि सड़क के लिए संघर्ष करने वाले एक आम ग्रामीण शनिच कश्यप का दूध से अभिषेक हुआ और यह पूरा घटनाक्रम अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

कुछ दिन पहले यही ग्रामीण बदहाल सड़क के गड्ढों में भरे कीचड़युक्त पानी से नहाकर व्यवस्था के खिलाफ अनोखा विरोध दर्ज करा रहा था। सड़क की दुर्दशा, गड्ढों और कीचड़ ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया था। बारिश के बीच ग्रामीणों ने धरना दिया, चक्काजाम किया और आंदोलन का ऐसा तरीका अपनाया, जिसने सोशल मीडिया से लेकर प्रशासन तक सभी का ध्यान खींच लिया।

आंदोलन रंग लाया। शासन ने डोंगाकोहरौद बस्ती तक 4.337 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 605.09 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दे दी। मंजूरी की खबर मिलते ही आंदोलन का प्रतीक बन चुके उसी ग्रामीण ने उसी स्थान पर दूध से स्नान कर सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। देखते ही देखते यह दृश्य लोगों के मोबाइल कैमरों में कैद हो गया और प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल खुशी का प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक संदेश है कि जब सरकार जनता की मांग सुनती है तो उसका स्वागत भी पूरे सम्मान के साथ होना चाहिए। जिस सड़क पर कभी कीचड़ में उतरकर विरोध करना पड़ा था, उसी सड़क पर आज दूध से स्नान कर उम्मीद जताई गई कि जल्द ही लोगों को बदहाल रास्ते से मुक्ति मिलेगी।

हालांकि, सड़क की स्वीकृति के साथ ही राजनीतिक दलों के बीच श्रेय लेने की होड़ भी शुरू हो गई है। कोई इसे अपनी मेहनत बता रहा है तो कोई अपनी सरकार की उपलब्धि। लेकिन, डोंगाकोहरौद के लोगों का कहना है कि यह जीत किसी एक नेता की नहीं, बल्कि उन सैकड़ों ग्रामीणों की है जिन्होंने बारिश, कीचड़ और परेशानियों के बीच सड़क के लिए आवाज बुलंद की।

पहले कीचड़ से व्यवस्था को जगाया, अब दूध से जताया धन्यवाद

डोंगाकोहरौद के इस अनोखे आंदोलन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लोकतंत्र में जनता यदि शांतिपूर्ण और रचनात्मक तरीके से अपनी बात रखे, तो उसकी आवाज आखिरकार सत्ता के गलियारों तक पहुंचती है। यहां कीचड़ से शुरू हुई लड़ाई अब उम्मीद के दूध तक पहुंच गई है।

Rajendra Rathore

राजेंद्र राठौर विगत 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। उनके परिवार में पत्रकारिता का कोई पारंपरिक इतिहास नहीं रहा, फिर भी उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की। उन्होंने वर्ष 2001 में दैनिक नवभारत में सर्वेयर के रूप में अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की। वर्ष 2017 में उन्होंने दैनिक नवीन कदम समाचार पत्र समूह में कार्यभार संभाला और तब से वे आज पर्यंत “स्थानीय संपादक” के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

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