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जहां मेहमान नहीं, परिवार बन जाते हैं पर्यटक: जशपुर का केरे गांव बन रहा ग्रामीण पर्यटन का नया सितारा

महुआ की महक, पहाड़ों की ठंडक और ग्रामीणों की आत्मीयता ने बनाया केरे को छत्तीसगढ़ का उभरता पर्यटन हब

एनकेडी@जशपुर। जिले के घने जंगलों, पहाड़ियों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच बसा केरे गांव आज ग्रामीण पर्यटन की नई मिसाल बनकर उभर रहा है। यह सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि उस बदलते छत्तीसगढ़ की तस्वीर है जहां विकास और परंपरा साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं।

जब शहरों की भागदौड़ और तनाव से थके लोग सुकून की तलाश में निकलते हैं, तो केरे गांव उन्हें प्रकृति की गोद में ऐसा अनुभव देता है, जिसे वे लंबे समय तक भूल नहीं पाते। यहां पहुंचने वाले पर्यटक किसी होटल के कमरे में नहीं, बल्कि स्थानीय परिवारों के घरों में बने होमस्टे में ठहरते हैं, जहां उनका स्वागत मेहमान नहीं बल्कि, परिवार के सदस्य की तरह किया जाता है।

सोमवार को जशपुर जिले के प्रभारी सचिव अंकित आनंद ने केरे गांव के होमस्टे का अवलोकन किया। उन्होंने यहां उपलब्ध सुविधाओं, पारंपरिक भोजन व्यवस्था और पर्यटकों के लिए संचालित गतिविधियों की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान उन्होंने ग्रामीणों की मेहनत और आत्मीय मेजबानी की सराहना करते हुए कहा कि ग्रामीण पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन रहा है।

केरे गांव की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सामुदायिक भागीदारी है। जिला प्रशासन के सहयोग से यहां पांच होमस्टे संचालित किए जा रहे हैं। ग्रामीणों को आतिथ्य प्रबंधन, पर्यटक सेवा और होमस्टे संचालन का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे वे पेशेवर तरीके से पर्यटकों का स्वागत कर सकें।

हाल ही में महुआ होमस्टे में ठहरे पर्यटकों के अनुभव इस पहल की सफलता की कहानी बयां करते हैं। पारंपरिक स्वागत, घर में बने स्थानीय व्यंजन, स्वच्छ वातावरण और ग्रामीण संस्कृति से सीधे जुड़ने का अवसर पर्यटकों को एक अलग दुनिया का अनुभव कराता है। यही कारण है कि यहां आने वाले पर्यटक सोशल मीडिया और अपने अनुभवों के माध्यम से केरे गांव का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं।

ग्रामीण पर्यटन की यह पहल केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। इससे गांव के युवाओं और महिलाओं को रोजगार मिल रहा है, स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है और लोगों की आय में भी वृद्धि हो रही है। साथ ही क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराएं और प्राकृतिक संसाधन भी संरक्षित हो रहे हैं।

कभी सामान्य ग्रामीण बस्ती के रूप में पहचाना जाने वाला केरे गांव आज छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर तेजी से अपनी जगह बना रहा है। यदि इसी तरह सामुदायिक भागीदारी और प्रशासनिक सहयोग मिलता रहा तो आने वाले वर्षों में केरे गांव देशभर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है। जशपुर का यह गांव यह साबित कर रहा है कि विकास केवल बड़े शहरों में नहीं, बल्कि गांवों की चौपाल, पहाड़ियों की वादियों और ग्रामीणों की मुस्कान में भी दिखाई देता है।

Rajendra Rathore

राजेंद्र राठौर विगत 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। उनके परिवार में पत्रकारिता का कोई पारंपरिक इतिहास नहीं रहा, फिर भी उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की। उन्होंने वर्ष 2001 में दैनिक नवभारत में सर्वेयर के रूप में अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की। वर्ष 2017 में उन्होंने दैनिक नवीन कदम समाचार पत्र समूह में कार्यभार संभाला और तब से वे आज पर्यंत “स्थानीय संपादक” के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

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