दिल्ली के हॉस्टल से निकले 13 ‘सिविल सर्विसेज़ सितारे’, छत्तीसगढ़ के वनांचल ने UPSC में दर्ज कराई दमदार दस्तक
सीटें 50 से बढ़ाकर 200 करने का दिखा असर, दूरस्थ आदिवासी और ग्रामीण अंचलों के युवाओं ने प्रीलिम्स में लहराया सफलता का परचम

रायपुर। राजधानी दिल्ली के एक हॉस्टल से निकली सफलता की यह कहानी आज पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणा बन गई है। जिन युवाओं के गांव कभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जरूरी संसाधनों से दूर माने जाते थे, उन्हीं दूरस्थ जनजातीय और ग्रामीण अंचलों के 13 युवाओं ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 में सफलता हासिल कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।
नई दिल्ली के द्वारका स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल में रहकर तैयारी कर रहे इन अभ्यर्थियों की सफलता को केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि अवसर मिलने पर प्रतिभा के निखरने का जीवंत उदाहरण माना जा रहा है। खास बात यह है कि अधिकांश सफल विद्यार्थी सामाजिक रूप से वंचित, आदिवासी और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर की सबसे कठिन परीक्षाओं में अपनी क्षमता साबित की है।
इस उपलब्धि के पीछे राज्य सरकार द्वारा ट्राइबल यूथ हॉस्टल की क्षमता में किए गए बड़े विस्तार को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्णय से हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर 200 की गई थी। अब उसी फैसले का सकारात्मक परिणाम सामने आने लगा है। अधिक सीटें मिलने से दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को दिल्ली में रहकर बेहतर माहौल, गुणवत्तापूर्ण कोचिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिला।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी सफल अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की युवा शक्ति के परिश्रम, प्रतिभा और संकल्प का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। इन युवाओं की सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी।
यूपीएससी प्रीलिम्स-2026 में सफलता प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों में गौतम कुमार, कुलभूषण सिंह पोया, हरि चंद्र प्रकाश सिंह, मयंक रात्रे, मलिकराम पटेल, आर्यन राठौर, चेतन लाल, हरीश कुमार पटेल, किशन लाल साहू, सत्यनारायण चंद्राकर, दीक्षा दिवाकर, विकेश कुर्रे और प्रकाश पटेल शामिल हैं।
ट्राइबल यूथ हॉस्टल की स्थापना अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिभाशाली युवाओं को सिविल सेवा सहित विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। यहां विद्यार्थियों को निःशुल्क आवास, पौष्टिक भोजन, पुस्तकालय, अध्ययन कक्ष, उत्कृष्ट कोचिंग और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है।
आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि यह सफलता साबित करती है कि सही दिशा और अवसर मिलने पर ग्रामीण और आदिवासी अंचलों की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं। वहीं विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने इसे राज्य सरकार की शैक्षणिक पहल और मार्गदर्शन व्यवस्था का सकारात्मक परिणाम बताया।
13 युवाओं की यह सफलता केवल एक परीक्षा में चयन भर नहीं है, बल्कि यह संदेश भी है कि छत्तीसगढ़ के गांवों और वनांचलों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ अवसर, मार्गदर्शन और भरोसे की होती है। दिल्ली के ट्राइबल यूथ हॉस्टल से निकली यह सफलता अब हजारों युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने जा रही है।






