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बीमा कंपनी की मनमानी पर उपभोक्ता आयोग सख्त: स्टार हेल्थ इंश्योरेंस को उपभोक्ता को 9.60 लाख रुपये, क्षतिपूर्ति व मुकदमा खर्च देने का आदेश

आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के तहत परिवाद स्वीकार करते हुए कंपनी को आदेशित किया कि वह 45 दिनों के भीतर शेष बीमा राशि 9,60,699 रुपये, मानसिक क्षतिपूर्ति 20,000 रुपये तथा मुकदमा खर्च 5,000 रुपये का भुगतान करे।

NKD@जांजगीर-चांपा। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जांजगीर-चांपा ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बीमा कंपनी द्वारा स्वास्थ्य बीमा दावा राशि का पूर्ण भुगतान नहीं किए जाने को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना है। आयोग ने स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को उपभोक्ता को शेष बीमा राशि 9,60,699 रुपये, मानसिक क्षतिपूर्ति 20,000 रुपये तथा मुकदमा खर्च 5,000 रुपये अदा करने का आदेश दिया है।

जानकारी के अनुसार, चांपा के अग्रसेन चौक निवासी संजय कुमार अग्रवाल (55) ने 31 मार्च 2021 को स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी से 15 लाख रुपये की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। लगातार चार वर्षों तक पॉलिसी का नवीनीकरण कराने पर उन्हें 5 लाख रुपये का बोनस भी मिला, जिससे उनकी कुल बीमित राशि बढ़कर 20 लाख रुपये हो गई। नवीनीकरण के बाद पॉलिसी 31 मार्च 2025 से 30 मार्च 2026 तक प्रभावी थी।

बीमा अवधि के दौरान संजय अग्रवाल गंभीर रूप से बीमार हो गए और उन्हें मुंबई स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में दो बार भर्ती होकर इलाज कराना पड़ा। पहली बार 31 मार्च 2025 से 14 अप्रैल 2025 तक भर्ती रहने पर इलाज में 16,32,991 रुपये का खर्च आया। इसके बाद पुनः 29 अप्रैल 2025 से 6 मई 2025 तक भर्ती रहने पर 3,27,709 रुपये का अतिरिक्त खर्च हुआ।

इलाज के बाद उन्होंने बीमा कंपनी के समक्ष दावा प्रस्तुत किया। कंपनी ने पहले उपचार के लिए केवल 10 लाख रुपये का भुगतान किया, जबकि दूसरी बार हुए उपचार का पूरा दावा यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि बीमित राशि समाप्त हो चुकी है।

कंपनी के इस निर्णय से असंतुष्ट होकर संजय अग्रवाल ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग जांजगीर-चांपा में परिवाद प्रस्तुत कर शेष बीमा राशि 9,60,699 रुपये दिलाए जाने की मांग की।

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू, सदस्य विशाल तिवारी तथा सदस्य महिमा सिंह ने दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत शपथपत्रों, दस्तावेजों और तर्कों का परीक्षण किया। आयोग ने पाया कि उपभोक्ता की कुल बीमा राशि 20 लाख रुपये थी और दोनों बार के उपचार में हुआ कुल खर्च इसी सीमा के भीतर था। इसके बावजूद बीमा कंपनी द्वारा संपूर्ण दावा राशि का भुगतान नहीं किया गया।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा कंपनी ने बिना किसी वैध कारण के दावा राशि का भुगतान करने से इंकार कर सेवा में कमी तथा अनुचित व्यापारिक व्यवहार किया है। आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के तहत परिवाद स्वीकार करते हुए कंपनी को आदेशित किया कि वह 45 दिनों के भीतर शेष बीमा राशि 9,60,699 रुपये, मानसिक क्षतिपूर्ति 20,000 रुपये तथा मुकदमा खर्च 5,000 रुपये का भुगतान करे।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है तो आदेश की तारीख से वास्तविक भुगतान तक आदेशित राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

प्रमुख बिंदु

👉 बीमा राशि थी कुल 20 लाख रुपये.

👉 इलाज में कुल खर्च हुआ 19.60 लाख रुपये से अधिक.

👉 कंपनी ने केवल 10 लाख रुपये का भुगतान किया.

👉 उपभोक्ता आयोग ने माना सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार.

👉 कंपनी को 9.60 लाख रुपये, 20 हजार क्षतिपूर्ति और 5 हजार मुकदमा खर्च देने का आदेश.

👉 भुगतान में देरी होने पर 7% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

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