केवा गांव में जगह-जगह खड़े रेत के पहाड़, आखिर किसकी है यह डंप रेत ? खनिज अमले को जानकारी लेने तक की फुर्सत नहीं!
खुलेआम हो रहे इस भंडारण को देखकर अब लोगों के बीच बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में डंप की गई रेत किसकी है और किसके संरक्षण में यह पूरा खेल संचालित हो रहा है?

एनकेडी@रायपुर। जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ विकासखंड के ग्राम केवा में हसदेव नदी से हो रहे अवैध रेत उत्खनन का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। गांव और नदी किनारे इन दिनों जगह-जगह रेत के बड़े-बड़े पहाड़ खड़े दिखाई दे रहे हैं। खुलेआम डंप की गई इस भारी मात्रा में रेत को देखकर अब लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर यह रेत किसकी है और किसके संरक्षण में इतने बड़े स्तर पर भंडारण किया जा रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि हसदेव नदी से दिन-रात जेसीबी और चैन माउंटेन मशीनों के जरिए रेत निकालकर गांव के अलग-अलग स्थानों पर डंप की जा रही है। इसके बाद इन्हीं डंपों से हाइवा और ट्रैक्टरों के जरिए रेत को जांजगीर-चांपा, बिलासपुर, बलौदाबाजार समेत आसपास के कई जिलों में भेजा जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि गांव में खुलेआम हजारों घनमीटर रेत डंप है, फिर भी खनिज विभाग की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि खनिज अमला मौके पर पहुंचकर जांच करना तो दूर, जानकारी लेने तक की जहमत नहीं उठा रहा।
क्षेत्र में अब यह चर्चा भी तेज हो गई है कि अवैध रेत कारोबार से जुड़े लोगों के खनिज विभाग, खासकर माइनिंग इंस्पेक्टर से अच्छे संबंध होने के कारण कार्रवाई प्रभावी तरीके से नहीं हो पा रही। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कुछ भी सामने नहीं आया है, लेकिन लगातार जारी अवैध उत्खनन और सीमित कार्रवाई ने लोगों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
रेत का पहाड़ सबको दिख रहा, लेकिन विभाग को नहीं ?
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में खुलेआम रेत के विशाल भंडारण मौजूद हैं, लेकिन खनिज विभाग (खासकर माइनिंग इंस्पेक्टर) को इसकी जानकारी लेने तक की फुर्सत नहीं है। लोगों का कहना है कि यदि कोई आम व्यक्ति थोड़ी मात्रा में रेत रख ले तो तुरंत कार्रवाई हो जाती है, लेकिन यहां हजारों घनमीटर रेत खुले में डंप है और जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या खनिज विभाग (खासकर माइनिंग इंस्पेक्टर) को इन डंपों की जानकारी नहीं है, या फिर सबकुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?

अधिकारियों और खनन माफियाओं के गठजोड़ की चर्चा
ग्राम केवा में जगह-जगह रेत के विशाल भंडारण खुलेआम दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर डंपिंग और परिवहन बिना संरक्षण के संभव नहीं हो सकता। यही वजह है कि अब लोगों के बीच जिम्मेदार अधिकारियों और खनन माफियाओं के गठजोड़ की चर्चा तेजी से फैल रही है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में गंभीर होता तो नदी के भीतर चल रही मशीनों को जब्त किया जाता, डंपिंग स्थलों पर कार्रवाई होती और पूरे नेटवर्क की जांच सामने आती। लेकिन कार्रवाई केवल छोटे स्तर पर होती दिखाई दे रही है।

अवैध उत्खनन से मालामाल हो रहे रेत माफिया
स्थानीय लोगों के मुताबिक, ग्राम केवा में अवैध रेत कारोबार अब पूरी तरह संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है। रोजाना 100 से 150 हाइवा और सैकड़ों ट्रैक्टरों से रेत का परिवहन किया जा रहा है। प्रति हाइवा 3000 से 3500 रुपए तक वसूली की चर्चा है, जिससे रोजाना लाखों रुपए का अवैध कारोबार संचालित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जो लोग कभी छोटे स्तर पर रेत निकालते थे, आज वे महंगे वाहन, हाइवा, टीपर, जेसीबी और चैन माउंटेन मशीनों के मालिक बन चुके हैं।

आखिर कार्रवाई सिर्फ छोटे वाहनों पर ही क्यों ?
क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि प्रशासन केवल दो-चार वाहनों को पकड़कर कार्रवाई का दिखावा कर रहा है, जबकि असली खेल डंपिंग स्थलों और नदी के भीतर चल रही मशीनों का है। यदि प्रशासन वास्तव में गंभीर है तो सबसे पहले इन अवैध रेत डंपों की जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में रेत किसकी है।




