राम-निषाद मिलन की यादें हुईं ताजा: अकलतरा में दिखी आत्मीयता और राजनीतिक सौहार्द की मिसाल, गुंडरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद के अकलतरा आगमन पर विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने घर के द्वार पर गले लगाकर किया स्वागत
अकलतरा में हुआ यह आत्मीय मिलन केवल दो विधायकों की मुलाकात नहीं, बल्कि यह संदेश भी था कि सार्वजनिक जीवन में सम्मान, अपनत्व और सामाजिक सौहार्द की परंपरा आज भी जीवित है। रामायण के राम-निषाद मिलन की तरह यह दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा और उपस्थित जनसमूह ने इसे यादगार क्षण बताया।

राजेंद्र राठौर@अकलतरा। राजनीति के गलियारों में जहां अक्सर मतभेद और प्रतिस्पर्धा की चर्चाएं होती हैं, वहीं रविवार को अकलतरा में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने लोगों को रामायण के उस भावुक प्रसंग की याद दिला दी, जब भगवान राम और निषादराज का मिलन हुआ था।
दरअसल, गुंडरदेही विधायक एवं निषाद (केंवट) समाज के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर सिंह निषाद के अकलतरा आगमन पर अकलतरा विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने उन्हें अपने निवास पर आमंत्रित किया। जैसे ही कुंवर सिंह निषाद विधायक निवास पहुंचे, राघवेंद्र कुमार सिंह स्वयं मुख्य द्वार तक पहुंचे और गले लगाकर उनका आत्मीय स्वागत किया।
इस दौरान मौजूद लोगों ने दोनों जनप्रतिनिधियों के बीच दिखाई दी आत्मीयता, सम्मान और स्नेह को राजनीतिक शिष्टाचार से कहीं बढ़कर बताया। स्वागत का यह दृश्य इतना भावपूर्ण था कि कई लोगों ने इसकी तुलना रामायण में भगवान राम और निषादराज के मिलन से कर दी, जहां पद और प्रतिष्ठा से ऊपर उठकर अपनत्व और मित्रता का संदेश देखने को मिलता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में इस तरह के सौहार्दपूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार समाज को सकारात्मक संदेश देते हैं। दोनों नेताओं के बीच हुई मुलाकात में सामाजिक समरसता, क्षेत्रीय विकास और समाज के विभिन्न वर्गों के हितों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम के दौरान समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समर्थक उपस्थित रहे। मुलाकात की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बनी रहीं, जहां लोगों ने इसे राजनीति में मर्यादा, सम्मान और आत्मीय रिश्तों का सुंदर उदाहरण बताया।
राजनीति से ऊपर रिश्तों का संदेश
अकलतरा में हुआ यह आत्मीय मिलन केवल दो विधायकों की मुलाकात नहीं, बल्कि यह संदेश भी था कि सार्वजनिक जीवन में सम्मान, अपनत्व और सामाजिक सौहार्द की परंपरा आज भी जीवित है। रामायण के राम-निषाद मिलन की तरह यह दृश्य लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा और उपस्थित जनसमूह ने इसे यादगार क्षण बताया।









