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सक्ती निवासी जगदीश प्रसाद बंसल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तात्कालिक अनुविभागीय अधिकारी इन्द्रजीत बर्मन सहित अन्य प्रतिवादियों को जारी किया नोटिस, 28 नवंबर 2026 को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता खुला है। हालांकि, ’अभी इस आदेश को हाईकोर्ट के फैसले पर अंतिम निर्णय या याचिकाकर्ता को मिली अंतिम राहत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।’ उपलब्ध आदेश में केवल प्रक्रियागत आवेदनों पर निर्णय, देरी की माफी और प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश है। मामले के मूल विवाद पर अंतिम फैसला इस आदेश में नहीं दिया गया है।

जांजगीर-सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जगदीश प्रसाद बंसल की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए सक्ती के तात्कालिक अनुविभागीय अधिकारी इन्द्रजीत बर्मन सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति अरुण पल्ली की पीठ ने 13 अक्टूबर 2026 को सुनवाई के दौरान याचिका पर आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।

सुप्रीम कोर्ट में यह मामला विशेष अनुमति याचिका (सिविल) डायरी क्रमांक 25728/2026 के रूप में दर्ज है। उक्त याचिका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की बिलासपुर पीठ द्वारा 18 फरवरी 2026 को प्रकरण क्रमांक एफए 48/2024 में पारित अंतिम निर्णय एवं आदेश के विरुद्ध दायर की गई है। याचिकाकर्ता जगदीश प्रसाद बंसल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र श्रीवास्तव ने पक्ष रखा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिका से संबंधित कुछ प्रक्रियागत आवेदनों पर भी निर्णय लिया। दस्तावेजों के आधिकारिक अनुवाद से छूट देने तथा तारीखों की विस्तृत सूची प्रस्तुत करने की अनुमति प्रदान की गई। इसके साथ ही याचिका दाखिल करने में हुई देरी को माफ कर दिया गया। आदेश में प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने और 28 नवंबर 2026 को जवाबी सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध करने का निर्देश दर्ज है। राज्य की ओर से स्थायी अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस की तामील कराने की अनुमति भी दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से मामले की आगे की न्यायिक प्रक्रिया का रास्ता खुला है। हालांकि, ’अभी इस आदेश को हाईकोर्ट के फैसले पर अंतिम निर्णय या याचिकाकर्ता को मिली अंतिम राहत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।’ उपलब्ध आदेश में केवल प्रक्रियागत आवेदनों पर निर्णय, देरी की माफी और प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का निर्देश है। मामले के मूल विवाद पर अंतिम फैसला इस आदेश में नहीं दिया गया है।
याचिकाकर्ता जगदीश प्रसाद बंसल के अनुसार, सक्ती के तात्कालिक अनुविभागीय अधिकारी इन्द्रजीत बर्मन ने वर्ष 2018-19 में अपने कार्यकाल के दौरान उन पर एवं उनके पूरे परिवार पर व्यक्तिगत रंजिश रखते हुए विधि विरूद्ध नोटिस प्रेषित कर शारीरिक, आर्थिक एवं मानसिक रूप से परेशान किया था। जगदीश प्रसाद बंसल का आरोप है कि तात्कालिक अनुविभागीय अधिकारी इन्द्रजीत बर्मन द्वारा उन्हें परेशान न करने के फलस्वरूप 5 लाख रूपए की अवैध राशि की मांग की थी, जिसके कारण उनके द्वारा एक वैधानिक नोटिस तात्कालिक अनुविभागीय अधिकारी इन्द्रजीत बर्मन को प्रेषित की गई। नोटिस प्राप्ति के एक सप्ताह के अंदर तात्कालिक अनुविभागीय अधिकारी इन्द्रजीत बर्मन द्वारा व्यक्तिगत रंजिश एवं नोटिस प्राप्ति से आगबबूला होकर उनके विरूद्ध एफआईआर दर्ज करवाकर उन्हें जेल भिजवा।
उक्त एफआईआर को विधि विरूद्ध पाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उसे निरस्त कर दिया, तब उनके द्वारा तात्कालिक अनुविभागीय अधिकारी इन्द्रजीत बर्मन के विरूद्ध ख्याति एवं प्रतिष्ठा, आर्थिक नुकसान को लेकर एक करोड़ रूपए की मानहानि का मामला प्रस्तुत किया गया। जिला न्यायालय एवं उच्च न्यायालय से असफलता मिलने पर उनके द्वारा सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में एक करोड़ रूपए मानहानि स्वरूप दिलाए जाने के संबंध में एसएलपी प्रस्तुत की गई।
13 अक्टूबर 2026 को प्रस्तुत उक्त एसएलपी को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तात्कालिक अनुविभागीय अधिकारी इन्द्रजीत बर्मन सहित अन्य 2 को न्यायालय में उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत करने के लिए आदेशित किया है। याचिकाकर्ता जगदीश प्रसाद बंसल के अनुसार, तात्कालिक अनुविभागीय अधिकारी इन्द्रजीत बर्मन द्वारा उनकी पत्नी श्रीमती हेमलता बंसल के विरूद्ध भी एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जो अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।




