JANJGIR-CHAMPA: अब नहीं चलेगी कर्ज की दादागिरी: जिला न्यायालय ने 129 फाइनेंस अवॉर्ड किए रद्द
एकतरफा आर्बिट्रेशन, मनमानी वसूली और भारी ब्याज पर न्यायालय की सख्त टिप्पणी; हजारों ऋणग्राहकों को मिली राहत

जांजगीर-चांपा। निजी फाइनेंस कंपनियों की ऋण वसूली की कार्यप्रणाली पर जिला न्यायालय ने ऐसा फैसला सुनाया है, जिसे आम उपभोक्ताओं के अधिकारों की बड़ी जीत माना जा रहा है। वर्षों से कर्ज, भारी ब्याज और कानूनी दबाव झेल रहे ऋणग्राहकों के पक्ष में खड़े होते हुए जिला न्यायालय ने फाइनेंस कंपनियों को बड़ा झटका दिया है।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयदीप गर्ग ने निजी फाइनेंस कंपनियों के पक्ष में पारित 129 आर्बिट्रेशन अवॉर्ड को शून्य घोषित करते हुए उनसे संबंधित निष्पादन याचिकाओं को भी निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद उन सैकड़ों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन पर कुर्की, जब्ती और वसूली की कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा था।
मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि वाहन ऋण देने वाली कई निजी फाइनेंस कंपनियां हायर परचेज एग्रीमेंट के माध्यम से ग्राहकों को कर्ज उपलब्ध कराती थीं। आरोप है कि ऋण पर 18 से 36 प्रतिशत तक ब्याज वसूला जाता था और किश्तों में चूक होने पर तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी जाती थी।
न्यायालय के समक्ष यह भी सामने आया कि कई मामलों में ऋणग्राहकों को सुनवाई की समुचित सूचना तक नहीं दी गई। स्थानीय क्षेत्राधिकार को दरकिनार कर दूसरे राज्यों में आर्बिट्रेटर नियुक्त किए गए और वहीं से एकतरफा फैसले हासिल कर लिए गए। बाद में इन्हीं आदेशों के आधार पर वसूली और कुर्की की प्रक्रिया शुरू की जाती थी।
अदालत ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत माना। न्यायालय ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी बात रखने का अवसर दिए बिना उसके खिलाफ आदेश पारित करना न्यायिक प्रक्रिया की मूल भावना के खिलाफ है। साथ ही मनमाने ढंग से क्षेत्राधिकार तय कर आर्बिट्रेशन कराना भी विधि सम्मत नहीं माना जा सकता।
फैसले में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून के नाम पर किसी भी पक्ष को एकतरफा लाभ नहीं दिया जा सकता और न्यायिक प्रक्रिया का पालन हर स्थिति में अनिवार्य है। इसी आधार पर सभी 129 आर्बिट्रेशन अवॉर्ड और उनसे संबंधित निष्पादन प्रकरणों को निरस्त कर दिया गया।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में फाइनेंस कंपनियों की कार्यप्रणाली पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। साथ ही यह निर्णय उन ऋणग्राहकों के लिए भी मिसाल बनेगा, जो बिना पर्याप्त सुनवाई के कानूनी कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।




