घाटे की खेती छोड़ अपनाई नई तकनीक: शेडनेट में खीरे की खेती से किसान ने कमाए 2 लाख, जैविक खेती और मुर्गी पालन से बनाई आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
दिगेश्वर प्रसाद वर्षों से परंपरागत तरीके से सब्जियों की खेती करते थे। लेकिन कभी बेमौसम बारिश तो कभी तेज धूप और बाजार में दाम गिरने से मेहनत का पूरा फल नहीं मिल पाता था। लगातार नुकसान के बीच उन्होंने हार मानने के बजाय समाधान तलाशा और उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया। विभाग के अधिकारियों ने उन्हें शेडनेट तकनीक अपनाने की सलाह दी।

शहजाद खान@सक्ती/जैजैपुर। कभी मौसम की मार और बाजार की अनिश्चित कीमतों से परेशान रहने वाले जैजैपुर विकासखंड के ग्राम ओड़ेकेरा निवासी किसान दिगेश्वर प्रसाद आदित्य की कहानी आज पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गई है। पारंपरिक खेती में लगातार घाटा झेलने वाले दिगेश्वर ने जब आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती का रास्ता चुना, तो उनकी किस्मत ही बदल गई। आज वही खेत, जो कभी चिंता का कारण था, लाखों की आमदनी का जरिया बन चुका है।
दिगेश्वर प्रसाद वर्षों से परंपरागत तरीके से सब्जियों की खेती करते थे। लेकिन कभी बेमौसम बारिश तो कभी तेज धूप और बाजार में दाम गिरने से मेहनत का पूरा फल नहीं मिल पाता था। लगातार नुकसान के बीच उन्होंने हार मानने के बजाय समाधान तलाशा और उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया। विभाग के अधिकारियों ने उन्हें शेडनेट तकनीक अपनाने की सलाह दी।
वर्ष 2024-25 में उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में शेडनेट लगाया। नियंत्रित वातावरण में खेती शुरू होते ही फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। इस सफलता ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और अगले ही वर्ष उन्होंने शेडनेट के भीतर वैज्ञानिक तरीके से खीरे की व्यावसायिक खेती शुरू की।
एक सीजन में 2 लाख रुपये की आय
उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और शासकीय अनुदान की मदद से तैयार की गई खीरे की फसल ने दिगेश्वर प्रसाद को करीब 2 लाख रुपये की आय दिलाई। बेहतर गुणवत्ता के कारण उनकी उपज को बाजार में अच्छा मूल्य मिला और खेती पहली बार घाटे से निकलकर मुनाफे का सौदा बन गई।
अब जैविक खेती और मुर्गी पालन से बढ़ रही आमदनी
खीरे की खेती में सफलता के बाद दिगेश्वर यहीं नहीं रुके। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों की जगह जैविक खाद का उपयोग शुरू किया, जिससे फसल की गुणवत्ता और बाजार में मांग दोनों बढ़ीं। साथ ही धान, विभिन्न सब्जियों की खेती और मुर्गी पालन को भी अपनी कृषि व्यवस्था का हिस्सा बनाया। एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाने से अब उनकी आय पूरे वर्ष बनी रहती है और परिवार आर्थिक रूप से पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुका है।
दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा
दिगेश्वर प्रसाद आदित्य का कहना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक सलाह और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग करें, तो कम भूमि में भी बेहतर उत्पादन और अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है। उनकी सफलता से आसपास के कई किसान भी शेडनेट और वैज्ञानिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।






