रोज़ी-रोटी की तलाश ले गया कश्मीर, लेकिन लौटी सिर्फ मौत की खबर… 21 साल के दीपक का अधूरा रह गया सपना
परिवार को भरोसा था कि कुछ वर्षों की मेहनत के बाद दीपक गांव लौटकर अपना घर बनाएंगे, बच्चे को अच्छी शिक्षा देंगे और माता-पिता का सहारा बनेंगे। लेकिन आतंक की एक घटना ने उन सभी सपनों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।

जैजैपुर (सक्ती)। घर की गरीबी कम करने के लिए जिसने बचपन में ही सपनों से ज्यादा जिम्मेदारियां उठा लीं, वह 21 वर्षीय दीपक रात्रे अब कभी अपने गांव नहीं लौटेगा। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले ने एक ऐसे परिवार की दुनिया उजाड़ दी, जो रोज़ी-रोटी की तलाश में हजारों किलोमीटर दूर गया था। गांव वालों को उम्मीद थी कि दीपक कुछ साल मेहनत कर घर की हालत बदल देगा, लेकिन शनिवार सुबह उसके घर पहुंची खबर ने हर उम्मीद को मातम में बदल दिया।
दीपक रात्रे, सक्ती जिले के मालखरौदा विकासखंड के ग्राम बुंदेली के रहने वाले थे। बचपन से ही वे अपने मामा के गांव हरदीडीह में रहकर पढ़ाई करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए कम उम्र में ही उन्होंने पढ़ाई छोड़ मेहनत की राह चुन ली। करीब एक साल पहले पिता उमाशंकर रात्रे के साथ जम्मू-कश्मीर चले गए, जहां पूरा परिवार ईंट-भट्ठे पर मजदूरी कर रहा था।
घर बसाने के सपने, लेकिन उजड़ गया आशियाना
दीपक की शादी अभी ज्यादा पुरानी नहीं थी। पत्नी के साथ उन्होंने एक छोटे से परिवार की शुरुआत की थी। उनकी गोद में एक नन्हा बच्चा भी है, जिसे शायद अभी यह भी नहीं पता कि उसके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।
परिवार को भरोसा था कि कुछ वर्षों की मेहनत के बाद दीपक गांव लौटकर अपना घर बनाएंगे, बच्चे को अच्छी शिक्षा देंगे और माता-पिता का सहारा बनेंगे। लेकिन आतंक की एक घटना ने उन सभी सपनों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया।
एक फोन की घंटी ने बदल दी जिंदगी
बताया जाता है कि आतंकी हमले की सूचना मिलने के बाद जैजैपुर पुलिस हरदीडीह पहुंची। जैसे ही परिजनों को घटना की जानकारी मिली, घर में चीख-पुकार मच गई। मां-बाप, पत्नी और रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस बेटे के लौटने का इंतजार था, अब उसकी पार्थिव देह का इंतजार हो रहा है।
रोज़गार की मजबूरी, मौत का सफर
दीपक की कहानी सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं है। यह उन हजारों मजदूर परिवारों की कहानी भी है, जो रोजगार के अभाव में अपने गांव-घर से हजारों किलोमीटर दूर जाकर कठिन परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं। वे बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर जाते हैं, लेकिन कभी-कभी हालात ऐसे बन जाते हैं कि परिवारों के हिस्से सिर्फ इंतजार और आंसू ही रह जाते हैं।
बुंदेली और हरदीडीह गांव में पसरा सन्नाटा
दीपक की मौत की खबर के बाद बुंदेली और हरदीडीह दोनों गांवों में शोक का माहौल है। ग्रामीणों की जुबान पर एक ही सवाल है कि रोटी कमाने गया बेटा आखिर आतंक का शिकार क्यों बना? हर आंख नम है और हर कोई उस युवा को याद कर रहा है, जिसकी जिंदगी अभी शुरू ही हुई थी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे कायराना आतंकी हमला बताया है। उन्होंने मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायल श्रमिक के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।





