जांजगीर-चांपा में जिला पंचायत अध्यक्ष इंजी. सत्यलता आनंद मिरी का ऐतिहासिक फैसला, अब टेबल पर नहीं दिखेंगी पानी की प्लास्टिक बोतलें
अब जिला पंचायत की सामान्य सभा सहित सभी बैठकों में सिंगल यूज प्लास्टिक की पानी की बोतलों का उपयोग पूरी तरह बंद रहेगा। इसके स्थान पर स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।

राजेंद्र राठौर@जांजगीर-चांपा। सरकारी बैठकों में मेजों पर सजी प्लास्टिक की पैक्ड पानी की बोतलें अब जांजगीर-चांपा जिला पंचायत की पहचान नहीं होंगी। जिला पंचायत अध्यक्ष इंजी. सत्यलता आनंद मिरी की पहल पर सामान्य सभा ने सर्वसम्मति से ऐसा निर्णय लिया है, जो प्रशासनिक कार्यशैली को पर्यावरण के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब जिला पंचायत की सामान्य सभा सहित सभी बैठकों में सिंगल यूज प्लास्टिक की पानी की बोतलों का उपयोग पूरी तरह बंद रहेगा। इसके स्थान पर स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। सूत्रों के अनुसार, सामान्य सभा में इस प्रस्ताव का किसी भी सदस्य ने विरोध नहीं किया और इसे सर्वसम्मति से मंजूरी मिली। इससे स्पष्ट है कि जनप्रतिनिधियों ने पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर एकजुटता दिखाई।
बदलाव की शुरुआत सरकारी दफ्तरों से
अक्सर पर्यावरण संरक्षण के लिए आम लोगों से अपील की जाती है, लेकिन इस बार जिला पंचायत ने खुद उदाहरण पेश करने का प्रयास किया है। यदि सरकारी कार्यालय ही प्लास्टिक मुक्त व्यवस्था अपनाते हैं, तो इसका सकारात्मक असर समाज पर भी पड़ेगा।
जिला पंचायत अध्यक्ष इंजी. सत्यलता आनंद मिरी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल अभियान नहीं, बल्कि व्यवहार में बदलाव का विषय है। छोटे-छोटे निर्णय भविष्य में बड़े परिणाम ला सकते हैं।
अन्य विभागों के लिए भी बनेगा मॉडल?
सामान्य सभा में मौजूद जनप्रतिनिधियों ने इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि कलेक्टोरेट, नगर पालिका, जनपद पंचायत, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य शासकीय कार्यालय, शिक्षण संस्थान और सार्वजनिक कार्यक्रम भी प्लास्टिक बोतलों के उपयोग को कम करें। यदि यह मॉडल व्यापक स्तर पर लागू होता है, तो जिले में प्लास्टिक कचरे में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
क्या बदलेगी सरकारी बैठकों की तस्वीर?
जिला पंचायत का यह फैसला केवल पानी की बोतलें हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संदेश देता है कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत नीतियों से नहीं, बल्कि रोजमर्रा की कार्यशैली से होती है। यदि इस निर्णय का प्रभाव अन्य सरकारी संस्थानों तक पहुंचता है, तो जांजगीर-चांपा प्रदेश के उन जिलों में शामिल हो सकता है, जहां प्रशासन ने प्लास्टिक मुक्त कार्यालय संस्कृति की ठोस शुरुआत की है।





