रहस्य बना 11वीं बटालियन की बैरक का ‘मोबाइल चोर’! साथी आरक्षक का फोन गायब, खाते से उड़ गए ₹4.87 लाख, फिर हुआ चौंकाने वाला खुलासा
आरोपी को ऑनलाइन गेम खेलने की लत थी। चोरी की गई पूरी रकम का बड़ा हिस्सा उसने ऑनलाइन गेम में खर्च कर दिया। यही लत उसे अपने ही साथी के साथ विश्वासघात और गंभीर अपराध तक ले गई।

जांजगीर-चांपा। 11वीं बटालियन की बैरक में हुई एक रहस्यमयी मोबाइल चोरी ने पुलिस महकमे को भी हैरान कर दिया। मामला तब और पेचीदा हो गया जब मोबाइल गायब होने के कुछ दिनों बाद पीड़ित आरक्षक को पता चला कि उसके बैंक खाते से 4,87,911 रुपए ऑनलाइन निकाल लिए गए हैं। शुरुआती दौर में यह किसी बड़े साइबर गैंग की करतूत मानी जा रही थी, लेकिन साइबर थाना की जांच ने ऐसा राज खोला जिसने सभी को चौंका दिया।
बैरक से गायब हुआ मोबाइल, खाते से उड़ गई जमा-पूंजी
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम चांदो निवासी एवं 11वीं बटालियन जांजगीर में पदस्थ आरक्षक सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि 23 अप्रैल 2026 की रात उन्होंने अपना मोबाइल बैरक में चार्जिंग पर लगाया था। ड्यूटी पर जाने से पहले जब मोबाइल लेने पहुंचे तो वह गायब था। काफी तलाश के बाद भी मोबाइल नहीं मिला।
कुछ दिन बाद जब पैसों की जरूरत पड़ने पर बैंक पहुंचे तो खाते में रकम नहीं थी। स्टेटमेंट निकलवाने पर पता चला कि 24 अप्रैल 2026 से 3 मई 2026 के बीच अलग-अलग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए ₹4.87 लाख निकाल लिए गए।
मोबाइल बना ‘चाबी’, आधार से बनाई UPI ID
जांच में सामने आया कि आरोपी ने चोरी किए गए मोबाइल में मौजूद आधार नंबर और अन्य जानकारी का इस्तेमाल कर नई UPI आईडी बनाई। इसके बाद धीरे-धीरे खाते से रकम निकालता रहा, ताकि किसी को तुरंत शक न हो।
सबसे बड़ा सवाल—साथी ही निकला गुनहगार
मामले की जांच जब साइबर थाना ने शुरू की तो संदेह 11वीं बटालियन के ही एक अन्य आरक्षक सुनील कुमार यादव पर गया। घटना के बाद उसका बटालियन परिसर से गायब रहना पुलिस के लिए बड़ा सुराग बना।
पूछताछ में आरोपी टूट गया और उसने पूरा अपराध स्वीकार कर लिया।
ऑनलाइन गेम की लत ने बना दिया अपराधी
पुलिस के अनुसार आरोपी को ऑनलाइन गेम खेलने की लत थी। चोरी की गई पूरी रकम का बड़ा हिस्सा उसने ऑनलाइन गेम में खर्च कर दिया। यही लत उसे अपने ही साथी के साथ विश्वासघात और गंभीर अपराध तक ले गई।
साइबर थाना की सक्रियता से खुला राज
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 303(2) तथा आईटी एक्ट की धारा 66-सी और 66-डी के तहत मामला दर्ज कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।
बड़े सवाल भी खड़े हुए…
- बैरक के भीतर से मोबाइल चोरी कैसे हो गया?
- आरोपी ने आधार और मोबाइल का उपयोग कर इतनी आसानी से UPI आईडी कैसे बना ली?
- बैंक खाते से लगातार निकासी होने के बावजूद अलर्ट सिस्टम क्यों प्रभावी नहीं रहा?
- क्या ऑनलाइन गेमिंग की लत पुलिसकर्मियों तक भी गंभीर खतरा बन चुकी है?
यह मामला सिर्फ एक चोरी नहीं, बल्कि विश्वास, साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन गेमिंग की लत—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस की जांच में मामला सुलझ गया, लेकिन इस घटना ने यह संदेश जरूर दे दिया कि डिजिटल सुरक्षा में छोटी सी लापरवाही भी लाखों रुपये का नुकसान करा सकती है।





