सप्ताहभर में ही फेल हुआ ‘प्लास्टिक मुक्त कलेक्ट्रेट’ अभियान: स्टील की बोतलों का दावा निकला हवा-हवाई, फिर बैठकों में लौटीं प्लास्टिक की पानी बोतलें
हाल ही में प्रकाशित समाचार में बताया गया था कि कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने स्वयं प्लास्टिक की बोतल से पानी पीने से इनकार कर स्टील की बोतल का उपयोग किया और निर्देश दिए कि कलेक्ट्रेट की सभी बैठकों से सिंगल यूज प्लास्टिक की बोतलों को पूरी तरह हटाया जाएगा। इसे जिले को ‘प्लास्टिक मुक्त’ बनाने की दिशा में एक अनुकरणीय पहल बताया गया था। लेकिन अब स्थिति इसके ठीक विपरीत दिखाई दे रही है।

जांजगीर-चांपा। पर्यावरण संरक्षण और सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक का संदेश देने के उद्देश्य से कलेक्ट्रेट में स्टील की बोतलों के उपयोग का जो अभियान बड़े प्रचार-प्रसार के साथ शुरू किया गया था, वह बमुश्किल एक सप्ताह भी नहीं टिक पाया। अब कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठकों में फिर से प्लास्टिक की पानी बोतलों का उपयोग खुलेआम किया जा रहा है। इससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह पहल केवल अखबारों की सुर्खियां बटोरने तक ही सीमित थी?

हाल ही में प्रकाशित समाचार में बताया गया था कि कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने स्वयं प्लास्टिक की बोतल से पानी पीने से इनकार कर स्टील की बोतल का उपयोग किया और निर्देश दिए कि कलेक्ट्रेट की सभी बैठकों से सिंगल यूज प्लास्टिक की बोतलों को पूरी तरह हटाया जाएगा। इसे जिले को ‘प्लास्टिक मुक्त’ बनाने की दिशा में एक अनुकरणीय पहल बताया गया था। लेकिन अब स्थिति इसके ठीक विपरीत दिखाई दे रही है। कलेक्ट्रेट की बैठकों में फिर से प्लास्टिक की बोतलें परोसी जा रही हैं। ऐसे में सवाल यह है कि यदि जिला प्रशासन स्वयं अपने फैसले का पालन नहीं कर पा रहा है, तो आम जनता और अन्य विभागों से पर्यावरण संरक्षण की अपेक्षा किस आधार पर की जाएगी?
आखिर वह आदेश गया कहां?
यदि प्रशासनिक निर्णय इतना ही गंभीर था, तो महज कुछ दिनों में उसकी धज्जियां क्यों उड़ गईं? अगर आदेश वापस नहीं लिया गया, तो उसका पालन किसने और क्यों बंद कर दिया? और यदि पालन ही नहीं होना था, तो फिर बड़े-बड़े दावे और प्रचार किसलिए किए गए?
क्या सिर्फ खबर तक सीमित था?
जिस पहल को प्रशासन की संवेदनशीलता और पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया गया था, वह अब केवल फोटो और समाचार कटिंग तक सिमटती दिखाई दे रही है। कलेक्ट्रेट में फिर से प्लास्टिक की बोतलें नजर आने से पूरे अभियान की गंभीरता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
आम जनता से कैसी उम्मीद?
प्रशासन अक्सर लोगों से सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग बंद करने की अपील करता है। दुकानदारों पर कार्रवाई होती है, जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन जब खुद कलेक्ट्रेट में ही प्लास्टिक की बोतलों का उपयोग जारी है, तो जनता के बीच क्या संदेश जाएगा?
जिम्मेदारों पर होगी कार्रवाई?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह पहल केवल प्रचार पाने के लिए थी या वास्तव में लागू करने के लिए? यदि आदेश का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी अन्य घोषणाओं की तरह कुछ दिनों बाद फाइलों में दब जाएगा?
उठ रहे हैं कई सवाल
👉 क्या स्टील की बोतलों का उपयोग सिर्फ एक-दो बैठकों तक ही सीमित था?
👉 यदि प्लास्टिक मुक्त कलेक्ट्रेट का निर्णय लिया गया था तो उसे लागू रखने की जिम्मेदारी किसकी थी?
👉 क्या अब फिर से प्लास्टिक की बोतलों के उपयोग की अनुमति दे दी गई है?
👉 यदि नहीं, तो आदेश का उल्लंघन करने वालों पर क्या कार्रवाई होगी?




