पितृ पक्ष में भाव-विभोर हुआ शिवरीनारायण मठ, पूर्वाचार्य महन्त लालदास जी महाराज को श्रद्धापूर्वक किया गया स्मरण
प्रातःकाल महानदी के पावन त्रिवेणी संगम बावा घाट पर महामंडलेश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने प्रातः 6 बजे श्री महन्त लालदास जी महाराज सहित मठ के सभी पूर्वाचार्यों का विधिवत तर्पण किया। पितरों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा से भरे इस अवसर पर वातावरण में गहरी आध्यात्मिक अनुभूति दिखाई दी। महानदी की शांत धारा के बीच जब पूर्वाचार्यों के निमित्त तर्पण अर्पित किया गया, तो उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें भी श्रद्धा से नम हो उठीं।

राजेंद्र राठौर@शिवरीनारायण। पितृ पक्ष के पावन अवसर पर श्री शिवरीनारायण मठ में सोमवार को वातावरण श्रद्धा, भक्ति और भावनाओं से ओत-प्रोत नजर आया। मठ के पूर्वाचार्य पूज्य श्री महन्त लालदास जी महाराज के पुण्य स्मरण में संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं एवं विप्रजनों ने उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित कर उनके धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक योगदान को भावपूर्ण स्मरण किया।

प्रातःकाल महानदी के पावन त्रिवेणी संगम बावा घाट पर महामंडलेश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने प्रातः 6 बजे श्री महन्त लालदास जी महाराज सहित मठ के सभी पूर्वाचार्यों का विधिवत तर्पण किया। पितरों के प्रति कृतज्ञता और श्रद्धा से भरे इस अवसर पर वातावरण में गहरी आध्यात्मिक अनुभूति दिखाई दी। महानदी की शांत धारा के बीच जब पूर्वाचार्यों के निमित्त तर्पण अर्पित किया गया, तो उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें भी श्रद्धा से नम हो उठीं।

इसके पश्चात मठ परिसर में विधि-विधानपूर्वक होम-हवन संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों से पूरा मठ परिसर भक्तिमय हो उठा। दोपहर में भगवान श्री शिवरीनारायण जी की पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद मठ की परंपरा के अनुरूप ब्राह्मण भोज का आयोजन किया गया। नगर के सभी विप्र बंधुओं ने मठ पहुंचकर भोजन प्रसाद ग्रहण किया। उन्हें सम्मानपूर्वक दक्षिणा प्रदान कर विदाई दी गई।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज ने कहा कि श्री महन्त लालदास जी महाराज का जीवन धर्म, अध्यात्म, सेवा और सनातन परंपराओं के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण रहा है। उन्होंने धर्म और आध्यात्मिक चेतना के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके द्वारा किए गए धार्मिक कार्य और समाज को दिए गए आध्यात्मिक संदेश आज भी श्रद्धालुओं को धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने कहा कि पितृ पक्ष केवल अपने पूर्वजों के स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि उनके त्याग, संस्कार और आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का भी पर्व है। पूर्वाचार्यों ने जिस धर्मपरंपरा और सेवा की ज्योति को आगे बढ़ाया, उसे निरंतर प्रज्ज्वलित रखना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। श्री महन्त लालदास जी महाराज के पुण्य स्मरण के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर उनके चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित किए और भगवान श्री शिवरीनारायण जी से उनकी आत्मा की शांति तथा उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करने की प्रार्थना की।

पूरे मठ परिसर में दिनभर भक्ति, श्रद्धा और स्मृतियों का भावुक संगम देखने को मिला। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूर्वाचार्य की स्मृतियां आज भी मठ की दीवारों, मंदिर के प्रांगण और संतों के आशीर्वचनों में जीवंत हों। श्रद्धालुओं ने उनके बताए धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पितृ पक्ष का यह अवसर केवल एक पुण्य स्मरण बनकर नहीं रहा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी सनातन परंपरा, संस्कार और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का संदेश भी दे गया।




