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10 साल तक मिलता रहा फायदा… अब लौटाने होंगे 7 करोड़, जैजैपुर में 41 सहायक शिक्षक पंचायतों पर हाईकोर्ट के फैसले का बड़ा असर, प्रशासन ने कसी शिकंजे की तैयारी

अनुमान है कि प्रत्येक शिक्षक पर लगभग 18 लाख रुपये तक की रिकवरी आ सकती है। इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक हलचल तेज हो गई है

शहजाद खान @ जैजैपुर, सक्ती। सक्ती जिले के जैजैपुर जनपद पंचायत में वर्षों तक चला समान शिक्षक-समान वेतनमान का लाभ अब 41 सहायक शिक्षक पंचायतों के लिए भारी पड़ता नजर आ रहा है। बिलासपुर हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद प्रशासन ने इन शिक्षकों से करीब 7 करोड़ रुपये की वसूली की तैयारी शुरू कर दी है।

सूत्रों के मुताबिक, जिन शिक्षकों को वर्षों तक अतिरिक्त वेतनमान और आर्थिक लाभ मिला, अब उन्हीं से लाखों रुपये वापस लिए जाएंगे। अनुमान है कि प्रत्येक शिक्षक पर लगभग 18 लाख रुपये तक की रिकवरी आ सकती है। इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग से लेकर जिला प्रशासन तक हलचल तेज हो गई है।


2015 में मिला क्रमोन्नत वेतनमान, फिर शुरू हुआ पूरा खेल

जानकारी के अनुसार, जैजैपुर जनपद पंचायत के अंतर्गत कार्यरत 41 सहायक शिक्षक पंचायत, 17 जुलाई 1998 से विभिन्न प्राथमिक शालाओं में पदस्थ हैं। 10 वर्ष की सेवा पूर्ण होने के बाद जनपद पंचायत द्वारा 19 नवंबर 2015 को इन्हें क्रमोन्नत वेतनमान स्वीकृत किया गया था। इसके बाद वर्ष 2016 से 2021 तक इन शिक्षकों को “समान शिक्षक-समान वेतनमान” के आधार पर लगातार आर्थिक लाभ मिलता रहा। लेकिन शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के आदेश क्रमांक 411 के अनुसार यह लाभ केवल 1 नवंबर 2011 से 30 अप्रैल 2013 तक की अवधि के लिए ही मान्य था। यहीं से पूरा मामला विवादों में आ गया।


सीईओ ने 2016 में ही पकड़ ली थी गड़बड़ी

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब गड़बड़ी लगभग 10 साल पहले पकड़ ली गई थी, तो कार्रवाई आखिर रुकी क्यों रही? बताया जा रहा है कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं डिप्टी कलेक्टर एसएस राज ने 2 दिसंबर 2016 को तत्कालीन बीईओ को पत्र जारी कर संबंधित शिक्षकों की राशि का निर्धारण कर वेतन से वसूली करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। लेकिन संबंधित शिक्षकों द्वारा मामला न्यायालय में लंबित होने का हवाला दिया गया और वसूली की कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। अब हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के बाद प्रशासनिक फाइलें फिर से खुल गई हैं।


हाईकोर्ट ने साफ कहा – नियमित शिक्षकों के बराबर लाभ नहीं

5 मई 2026 को बिलासपुर हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया कि:

“सहायक शिक्षक पंचायत, स्कूल शिक्षा विभाग के नियमित शिक्षकों के समान 10 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर समान वेतनमान और अन्य लाभ पाने के अधिकारी नहीं हैं।”

इस आदेश के बाद अब विभाग के पास वसूली रोकने का कोई आधार नहीं बचा है।


अब सबसे बड़ा सवाल -जिम्मेदार कौन?

इस पूरे मामले में अब एक बड़ा प्रशासनिक सवाल भी खड़ा हो गया है। 
यदि शासन के आदेश के विपरीत लाभ दिया गया था, तो:

  • लाभ स्वीकृत किस आधार पर हुआ?
  • भुगतान की अनुमति किसने दी?
  • वर्षों तक ऑडिट और विभागीय जांच में मामला दबा क्यों रहा?
  • और जब 2016 में ही वसूली के निर्देश जारी हो गए थे, तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह मामला केवल शिक्षकों की रिकवरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।


डीईओ ने कही कार्रवाई की बात

जिला शिक्षा अधिकारी सक्ती श्रीमती कुमुदिनी बाघ ने कहा-

“उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप संबंधित सहायक शिक्षक पंचायतों से अतिशीघ्र वसूली की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है।”

Rajendra Rathore

राजेंद्र राठौर विगत 25 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। उनके परिवार में पत्रकारिता का कोई पारंपरिक इतिहास नहीं रहा, फिर भी उन्होंने इस क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की। उन्होंने वर्ष 2001 में दैनिक नवभारत में सर्वेयर के रूप में अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की। वर्ष 2017 में उन्होंने दैनिक नवीन कदम समाचार पत्र समूह में कार्यभार संभाला और तब से वे आज पर्यंत “स्थानीय संपादक” के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

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