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आईपीएल सट्टे पर छोटी कार्रवाई, बड़े खिलाड़ियों पर चुप्पी? चांपा पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठने लगे गंभीर सवाल

लोगों की मांग है कि केवल औपचारिक कार्रवाई कर प्रेस नोट जारी करने के बजाय पूरे सट्टा नेटवर्क की तह तक जाकर उन मुख्य संचालकों को बेनकाब किया जाए, जो लंबे समय से इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहे हैं।

NKD@जांजगीर-चांपा। जिले में आईपीएल क्रिकेट मैचों पर चल रहे ऑनलाइन सट्टेबाजी के कारोबार के बीच चांपा पुलिस द्वारा की गई हालिया कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार कर उसके पास से मोबाइल फोन और 46 हजार 270 रुपये नगद जब्त करने का दावा किया है, लेकिन चांपा शहर में चर्चा इस बात की ज्यादा है कि क्या पुलिस केवल छोटे एजेंटों तक ही सीमित रह गई है?

पुलिस के मुताबिक, चांपा क्षेत्र के मंझली तालाब के पास एक युवक आईपीएल मैच में ऑनलाइन सट्टा संचालित कर रहा था। सूचना मिलने पर थाना चांपा और साइबर थाना की संयुक्त टीम ने मौके पर दबिश देकर आरोपी संदीप यादव को गिरफ्तार किया। आरोपी के मोबाइल फोन में ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े सबूत मिलने की बात कही गई है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत कार्रवाई कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।

लेकिन, इस कार्रवाई के बाद चांपा शहर में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोगों का कहना है कि आईपीएल सट्टेबाजी का कारोबार जिले में कोई छोटा-मोटा खेल नहीं है। यह नेटवर्क लंबे समय से संगठित तरीके से संचालित हो रहा है, जिसमें बड़े सट्टेबाज, लाइन ऑपरेटर और बाहरी नेटवर्क से जुड़े लोग शामिल बताए जाते हैं। ऐसे में केवल एक युवक की गिरफ्तारी और कुछ हजार रुपये की जब्ती को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि हर साल आईपीएल सीजन आते ही ऑनलाइन सट्टेबाजी का कारोबार खुलेआम बढ़ जाता है। चांपा शहर के कई इलाकों में मोबाइल एप, आईडी और पैनल के जरिए लाखों रुपये का दांव लगाए जाने की चर्चा आम रहती है। इसके बावजूद, बड़े स्तर पर कार्रवाई नहीं होना कई संदेह पैदा करता है। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस वास्तव में सट्टे के खिलाफ गंभीर है, तो उन बड़े नामों तक कार्रवाई क्यों नहीं पहुंचती जिनके संरक्षण में पूरा नेटवर्क चलने की बात कही जाती है।

सूत्रों की मानें तो जिले में कुछ ऐसे सट्टा संचालक सक्रिय हैं, जिनका नेटवर्क केवल चांपा तक सीमित नहीं बल्कि अन्य शहरों और राज्यों तक फैला हुआ है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान के जरिए यह कारोबार तेजी से फैल रहा है। बावजूद इसके पुलिस की कार्रवाई अक्सर छोटे खिलाड़ियों या कथित एजेंटों तक ही सीमित नजर आती है। यही वजह है कि अब आम लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर बड़े सट्टेबाज पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों हैं।

चांपा शहर में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि कहीं न कहीं कार्रवाई का दायरा जानबूझकर सीमित तो नहीं रखा जा रहा। कई लोग इसे “छोटी मछलियों पर जाल और बड़ी मछलियों को खुली छूट” जैसी स्थिति बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस साइबर तकनीक और मोबाइल लोकेशन के आधार पर छोटे आरोपियों तक पहुंच सकती है, तो फिर बड़े नेटवर्क तक पहुंचना मुश्किल कैसे हो सकता है।

हालांकि, पुलिस लगातार अभियान चलाने और अवैध गतिविधियों पर सख्ती का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर आम नागरिक अब बड़ी कार्रवाई देखना चाहते हैं। लोगों की मांग है कि केवल औपचारिक कार्रवाई कर प्रेस नोट जारी करने के बजाय पूरे सट्टा नेटवर्क की तह तक जाकर उन मुख्य संचालकों को बेनकाब किया जाए, जो लंबे समय से इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चांपा पुलिस आने वाले दिनों में आईपीएल सट्टेबाजी के बड़े चेहरों तक पहुंच पाएगी, या फिर कार्रवाई सिर्फ छोटे नामों तक सीमित रहकर हर सीजन की तरह फाइलों में सिमट जाएगी।

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